डी.आई.एल.आर.एम.पी. की प्रक्रिया :-

                    वर्तमान में जरीब के माध्यम से तरमीम सर्वेक्षण किया जा रहा है। ई-धरती (DILRMP) के तहत प्रत्येक 20 वर्ष के स्थान पर वन-टाईम सैटलमेन्ट की अवधारणा को साकार करने की दृष्टि से आधुनिक सर्वे प्रणालियों में से सर्वाधिक एक्यूरेसी वाली प्रणाली यथा एच.आर.एस.आई., डी.जी.पी.एस. एवं ई.टी.एस. आदि से सर्वे किया जाएगा। इससे खेतों एवं ग्रामों की सीमाओं में ओवरलेपिंग व गेप का स्थाई समाधान, तरमीम सम्बन्धी समस्याओं का निराकरण, भूमि के क्षेत्रफल की वास्तविक गणना, सही मूल्याकंन, राजकीय योजनाओं के निर्माण, पंजीयन प्रक्रिया एवं भूमि अवाप्ति कार्यवाही आदि सुव्यवस्थित एवं निर्विवादित हो सकेगी। इसके अतिरिक्त पुराना रेकॅार्ड व्यवस्थित होकर सॉफ्टडाटा में कन्वर्ट हो सकेगा। विभिन्न प्रकार की राजकीय भूमियों का चिन्हीकरण होकर तहसील वार लैण्डबैंक तैयार किये जा सकते हैं, जिससे भविष्य में गांव के मॉडल मास्टर प्लान बनाना सुलभ हो सकेगा तथा आवश्यतानुसार इसे ऑनलाईन भी उपलब्ध कराया जा सकता है।