स्थापना

 

 

राजस्व मामलों के शीर्षस्थ न्यायालय एवं राजस्व प्रशासन के लिये प्रमुख नियामक एवं नियंत्रक के रूप में राजप्रमुख के अध्यादेश संख्या 22 वर्ष 1949 द्वारा दिनांक 12.08.49 को राजस्व मण्डल राजस्थान की स्थापना हुई. सन 1956 में उक्त अध्यादेश के स्थान पर राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम,1956 लागू किया गया. इस अधिनियम के तहत राजस्व मण्डल राजस्व मामलों में अपील, निगरानी तथा संदर्भ रेफरेंस के शीर्षस्थ न्यायालय एवं अधीनस्थ न्यायालयों के प्रशासनिक नियंत्रक के रूप में कार्यरत है. यह भू-प्रबंध से संबंधित न्यायिक मामले का भी शीर्ष न्यायालय है. राजस्व मामलों की शीर्षस्थ संस्था होने के कारण कालांतर में राजस्व मंडल को विभिन्न अधिनियमों में राज्य सरकार को प्रदत्त शक्तियां भी हस्तांतरित कर दी गई.
राजस्व मामलों में शीर्षस्थ न्यायालय होने के साथ-साथ राजस्व मंडल विभिन्न अधिनियमों के अन्तर्गत प्रदत्त शक्तियों के क्रियान्वन में राजस्व मंडल प्रशासनिक विभाग की ओर से सक्रिय भूमिका निभाता है तथा राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व करता है. राजस्व मंडल द्वारा भू-अभिलेख संधारण के पर्यवेक्षण का कार्य भी किया जा रहा है, जो न्यायिक न होकर एक प्रशासनिक कार्य है.